Rape in Rohtas
- प्रतीकात्मक तस्वीर

Rohtas Patrika/Sasaram:

10 साल की मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आज फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। शुक्रवार को केस की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (ADJ) सह पॉक्सो अधिनियम के विशेष न्यायाधीश नीरज बिहारी लाल की अदालत ने सजा सुनाई।

10 साल की मासूम की दुष्कर्म के बाद हुई थी हत्या

जिले के डालमियानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत गंगौली गांव में नवंबर 2020 में दीपावली की शाम बलराम सिंह 10 साल की मासूम को लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति दिखाने के बहाने ले गया था। पास के ही न्यू सिधौली गावं में मासूम के साथ रेप किया। इसके बाद जब उसे लगा कि वो फंस जाएगा तो उसने हत्या कर दी।

सबूतों को छिपाने के लिए उसने शव को अर्धनग्न हालात में ही बक्से में बंद करके रख में ही रख दिया। लोगों को जब शक हुआ तो आरोपी के घर तलाशी ली गई थी। पुलिस की मौजूदगी में बक्से से बच्ची का शव बरामद किया गया था। बच्ची अर्धनग्न अवस्था में पाई गई थी। लोगों ने बताया था कि बलराम की हरकत पहले भी अजीब किस्म की थी, इस कारण उसे मारा-पीटा भी गया था।

मामले को रेयर फॉर रेयरेस्ट मान की सुनवाई

इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से कोर्ट में 11 गवाहों की गवाही हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। वहीं, कोर्ट ने इस मामले को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता के परिवार को कंपनसेशन स्कीम फॉर वीमेन विक्टिम्स सरवाइवर ऑफ सेक्शुअल असाल्ट क्राइम 2019 के तहत 8 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने का आदेश भी जारी किया है।

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक हीरा प्रताप सिंह ने बताया कि 14 नवंबर 2020 की दोपहर 3 बजे जब बच्ची अपने घर के दरवाजे पर खेल रही थी, तभी बच्ची को लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति दिखाने का लालच देकर अपने घर में ले गया था और फिर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था।