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रोहतास पत्रिका/पंजाब: मोहाली स्थित CGC यूनिवर्सिटी ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ₹50 करोड़ की CGCUET स्कॉलरशिप योजना लॉन्च की है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी के एडमिशन और मार्केटिंग के जनरल मैनेजर डॉ. हितेश कलोटा ने दी। इस अवसर पर बिहार की राजधानी पटना के होटल रेड वेलवेट में प्रिंसिपल-कम-टीचर्स मीट का आयोजन भी किया गया, जिसमें 50 से अधिक स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हुए।

डॉ. हितेश कलोटा ने बताया कि CGC यूनिवर्सिटी, जो पहले CGC झंजेरी के नाम से जानी जाती थी, 2012 में स्थापित एक नई उम्र की यूनिवर्सिटी है। यह यूनिवर्सिटी NAAC A+ ग्रेड, NIRF रैंकिंग और NBA मान्यता के साथ उत्तरी भारत की अग्रणी यूनिवर्सिटियों में शामिल है। CGC यूनिवर्सिटी AI-आधारित कोर्स, मजबूत एकेडमिक्स, रिसर्च और बेहतरीन प्लेसमेंट पर विशेष फोकस करती है, जिससे छात्रों को शानदार करियर के अवसर मिलते हैं।

एकेडमिक सत्र 2026-27 के लिए लॉन्च की गई ₹50 करोड़ की CGCUET (CGC यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) स्कॉलरशिप का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक अंतर को पाटना है, ताकि कम आय वाले परिवारों के मेधावी छात्र बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें। इससे पहले यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप राशि ₹7 करोड़ थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹50 करोड़ कर दिया गया है।

पटना में आयोजित बैठक के दौरान नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर भी विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षकों और प्रिंसिपलों ने छात्रों के लिए सही कोर्स और कैंपस चयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. हितेश कलोटा ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का आधार शिक्षा है और शिक्षक समाज व राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

CGC यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री एस. रशपाल सिंह धालीवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश है और आर्थिक परेशानियां किसी के सपनों में बाधा नहीं बननी चाहिए। वहीं, मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अर्श धालीवाल ने कहा कि यह स्कॉलरशिप कार्यक्रम भविष्य के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगा।

CGCUET स्कॉलरशिप के चयन मानदंडों में एकेडमिक रिकॉर्ड, एंट्रेंस एग्जाम का प्रदर्शन, लीडरशिप क्वालिटी, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी, सम्मान और कार्य अनुभव शामिल हैं। CGC यूनिवर्सिटी का यह प्रयास देशभर के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के नए द्वार खोलेगा।

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रोहतास पत्रिका/काठमांडू: नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक ऐतिहासिक दिन देखा गया, जब यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का भव्य और प्रतिष्ठित आयोजन नरूलाज़ एंड कंपनी द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन की मुख्य आयोजिका रहीं डॉ. शिखा नरूला, जो यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की संस्थापक एवं अध्यक्ष और नरूलाज़ एंड कंपनी की संस्थापक भी हैं।

इस आयोजन का उद्देश्य नेपाल के विशिष्ट और समाज-सेवी व्यक्तित्वों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान दिलाना था। मुख्य अतिथि के रूप में नारायण दहाल, अध्यक्ष – राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली), नेपाल ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गौरवपूर्ण स्वरूप प्रदान किया।

विशेष अतिथियों में संतोष चालिसे, अध्यक्ष – वित्त समिति, नेपाल/सदस्य-प्रतिनिधि सभा, अब्दुल खान, सांसद – उद्योग, वाणिज्य, श्रम और उपभोक्ता कल्याण समिति, अनुराधा कोइराला, पूर्व गवर्नर – बागमती प्रदेश, पद्मश्री सम्मानित, संस्थापक – माईती नेपाल, और उर्मिला श्रेष्ठा, उपाध्यक्ष – चैंबर ऑफ कॉमर्स, नेपाल शामिल थे।

इस आयोजन में नेपाल के प्रतिष्ठित चेहरों को विश्व सम्मान से सम्मानित किया गया, जिन्होंने समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, उद्यमिता और मानव कल्याण में कार्य किए हैं। यह सम्मान समारोह भारत-नेपाल मैत्री को और मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा।

डॉ. शिखा नरूला को इवेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ नेपाल की मानद सदस्यता प्रदान की गई, जो भारत और नेपाल के सांस्कृतिक और आयोजन संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम रहा। राज लुइटेल, उपाध्यक्ष, इवेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ नेपाल ने आयोजन को सफल बनाने में एक कुशल आयोजक की भूमिका निभाई।

नरूलाज़ एंड कंपनी ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी पहचान बनाई और सिद्ध किया कि यह केवल एक इवेंट कंपनी नहीं, बल्कि एक विजनरी मंच है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृति, समाज और सरोकारों को जोड़ता है। इसकी निदेशक डॉ. शिखा नरूला न सिर्फ एक इवेंट डायरेक्टर, बल्कि लेखिका, कलाकार और सामाजिक बदलाव की प्रतीक हैं।

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IIM काशीपुर ने अपने प्रमुख दो वर्षीय MBA (2021-2023 बैच), MBA  एनालिटिक्स, एग्जीक्यूटिव एमबीए और डॉक्टरल कार्यक्रम के लिए अपने 10वें दीक्षांत समारोह की मेजबानी की। संस्थान ने बीते शनिवार को संपन्न हुए दीक्षांत समारोह में कुल 353 छात्रों को डिग्री प्रदान की, जिनमें 9 डॉक्टरल और 344 एमबीए स्नातक शामिल हैं। मुख्य अतिथि द्वारा शीर्ष प्रदर्शन करने वाले 07 छात्रों को संस्थान पदक और 01 छात्र को सर्वश्रेष्ठ आल राउंड प्रदर्शन पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, 13 एमबीए छात्रों और 3 एमबीए (एनालिटिक्स) छात्रों को डायरेक्टर्स मेरिट लिस्ट से सम्मानित किया गया।

37 लाख रुपये सालाना का पैकेज 

IIM काशीपुर ने इस वर्ष INR 37 LPA के उच्चतम पैकेज के साथ 100% प्लेसमेंट हासिल किया है। बैच 2021-23 का औसत CTC 19% की सालदरसाल (YOY) वृद्धि के साथ INR 18.11 LPA है। 2022 में 77 महिला छात्रों की प्लेसमेंट की तुलना में 2023 में 91 महिला छात्रों की प्लेसमेंट अनुपात में 18% की वृद्धि हुई है। रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड, एचएसबीसी, ब्लूमबर्ग, ट्रेसविस्टा, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, ईएक्सएल एनालिटिक्स, ईवाई, गार्टनर, थेमैथको, नोमुरा, एचएसबीसी, मॉर्गन स्टेनली, बैंक ऑफ अमेरिका, सोसाइटी जेनरेल, इंवेस्को सहित लगभग 150 कंपनियों ने 2023 के प्लेसमेंट मुहीम में हिस्सा लिया। आईटी और एनालिटिक्स, बीएफएसआई, रिटेल और ईकॉमर्स सेक्टर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में  छात्रों को परामर्श, वित्त, विपणन और बिक्री, संचालन, एनालिटिक्स और एचआर की भूमिकाओं में नौकरी की ऑफर मिली।

मुख्य अतिथि ने कही ये बात

एनसीडीईएक्स ईमार्केट्स लिमिटेड के एमडी और सीईओ मृगांक परांजपे ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्नातक करने वाले छात्रों के लिए आज का दिन एक महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि वे अपने जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। आईआईएम काशीपुर अकादमिक उत्कृष्टता के लिए अपनी प्रतिबद्धता और आज के गतिशील कारोबारी माहौल में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्नातक वर्ग अपने संबंधित क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल करेगा, और मैं उन्हें उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

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अंकित कुमार सिंह:- इन दिनों सिनेमाघरों में आर माधवन  निर्देशित फ़िल्म ‘रॉकेट्री’ बहुत लोकप्रिय हो रही है। यह फ़िल्म महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक नम्बी नारायणन की सफलता की कहानी को बताती है। ISRO ऐसे प्रयोग करता रहता है जो आम आदमी की जिंदगी में बदलाव तो लाता है, लेकिन उन्हें उनकी कहानी नहीं मालूम होती है। आइए आज ISRO के ‘नाविक’ की कहानी जानते हैं।

तो क्या है -‘नाविक’ ?

हमसबों ने रोज़मर्रा की जिंदगी में जीपीएस का प्रयोग तो देखा ही होगा। कही जाना हो तो जीपीएस का प्रयोग।कही से खाना मंगवाना हो तो जीपीएस का प्रयोग।आपको पता है, जिस जीपीएस का प्रयोग हम कर रहे है, वो हमारा नहीं है। जीपीएस अमेरिका की वैशिक नौवहन सेवा है। ठीक उसी प्रकार भारत ने अपनी क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली(IRNSS) को बनाने में सफलता पाई है। जिसे इसरो ने बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका नाम भारतीय मछवारों को समर्पित करते हुए इसका नाम ‘नाविक’ रखा है। यह भारत सरकार के पूर्णत आधीन रहनेवाला  क्षेत्रीय स्वायत नौवहन उपग्रह प्रणाली है। अमेरिका ,रुस, चीन के बाद यह प्रणाली विकसित करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है।

‘नाविक’ बनानें की प्रेरणा कहा से आई?

1999 के कारगिल युद्ध के समय भारतीय सेना को दुश्मनों के सही पोजीशन की जानकारी नही मिल पा रही थी। प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिका से स्ट्रैटजिक लोकेशन देने की मांग की। अमेरिका ने उनके अनुरोध को मना कर दिया। उसी समय से नाविक के विकसित होने की पटकथा की शुरुआत हो चुकी थी। भारतीय वैज्ञानिकों ने तभी से इसे विकसित करने के लिए अपने को तैयार कर लिया था।

‘नाविक’ काम कैसे करता है?

यह 8 उपग्रहों का समूह है। जिसकी मदद से यह 5 मीटर तक की स्थिति सटीकता वाले सभी उपयोगकर्ताओं को मानक पोजिशनिंग सेवा प्रदान करता है। नाविक दोहरी आवृति वाले  एस और एल बैंड है। इस कारण यह मानक स्थिति निर्धारण सेवा दे पाता है।इसके रखरखाव के लिए 18 केंद्र बनाए गए हैं।

कौन बेहतर है नाविक या जीपीएस?

जीपीएस 24 उपग्रहों का समूह है।जीपीएस वैश्विक नेविगेशन सिस्टम है।इसके लोकेशन देने की क्षमता का विस्तार अधिक है। जीपीएस की नज़र धरती के चप्पे-चप्पे पर होती है। नाविक एक क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम है।इसकी नौवहन क्षमता की एक सीमा निर्धारित है। इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि नाविक भारत की देशज तकनीक है।अब युद्धों के समय स्ट्रेटेजिक लोकेशन के लिए हमारी निर्भरता दूसरे देशों से ख़त्म हो गयी हैं।क्षेत्रीय स्तर पर इसकी सटीकता ज्यादा कारगर होगी। इसकी सेवा आम आदमी के साथ -साथ भारतीय सेना के लिए भी कारगर होगी। कुछ सेवाओं की सुविधा सिर्फ अधिकृत अधिकारियों तथा विभागों को होगी,जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत उपयोगी होगी।

अब जान लेते है नाविक का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है?
1. नक्शा तैयार करने में।
2. जिओडेटिक आंकड़े जुटाने में।
3. समय का बिल्कुल सही पता लगाने के लिए।
4. वाहनों का पता लगाने के लिए।
5. हवाई तथा समुद्री नौवहन के लिए।
6. चालकों के लिए।

क्या ‘नाविक’ आम लोगों के लिए उपलब्ध है?

अभी यह आम उपयोग में बहुत प्रचलित नहीं है।इसका एक मजबूत कारण यह है कि नाविक समर्थित हार्डवेयर का उपलब्ध नहीं होना।हमे ऐसे उपकरणों की ज़रूरत है जो नाविक समर्थित हो।साल 2019 से मोबाइल प्रोसेसर बनाने वाली कंपनियों और इसरो के बीच समझौता होता आ रहा है।धीरे-धीरे नाविक समर्थित उपकरण बाज़ार में आने लगेगा।

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में शाम 5 बजे बादल फटने की सूचना मिली है. ये बादल अमरनाथ गुफा के समीप फटा है. जानकारी के मुताबिक, हादसे में तक़रीबन 15 लोगों की मौत हो गई है और कई लोगों के लापता होने की सूचना है. मौके पर NDRF, SDRF और ITBP की टीम बचाव और राहत के कार्यों में जुटी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज तकरीबन 8-10 हजार तीर्थयात्री अमरनाथ पहुँचे थे. गुफा के नज़दीक ही तक़रीबन 30-40 टेंट हाउस थे जो कि बहाव में बह गए. प्रत्येक टेंट में चार-पांच लोग रहते हैं. यही लोग बहाव के चपेट में आए हैं

कितने लोग लापता है कोई आँकड़ा नहीं

NDRF के डीजी ने बताया कि शाम को सूचना मिली की अमरनाथ गुफा के नज़दीक बादल फटा है. कई टेंट हाउस बह गए हैं, कितने लोग लापता है अभी हमारे पास कोई फ़िक्स आँकड़ा नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि ऊँची पहाड़ी होने के कारण बचाव और रेसक्यू करने में चुनौतियों को सामना करना पड़ रहा है. हालांकि हमारे जवान इन कार्यों में कुशल है तो उन्हें कोई ज़्यादा परेशानी नहीं होगी. वहीं NDRF के डीजी ने बताया कि हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. अमरनाथ श्राइन बोर्ड के साथ कोआर्डिनेट करते हुए काम कर रहे है. इस क्षेत्र में नेटवर्क की दिक़्क़त है जो हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है . हम लाउडस्पीकर के ज़रिए हमें लोगों को बता रहे हैं कि आप लोग सुरक्षित स्थान पर चले जाए.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को लेकर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि “श्री अमरनाथ गुफा के पास बादले फटने से व्यथित हूं. शोक संतप्त परिवारों के प्रति में संवेदनाएं है. उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने हालात का जायजा लिया है. राहत और बचाव के कार्य जारी है. प्रभावित लोगों को हर संभव मदद की जाएगी.”

गृहमंत्री अमित शाह ने कुशलता की कामना

गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट करते हुए लिखा “बाबा अमरनाथ के पास बादल फटने से  आयी फ़्लैश फ्लड के संबंध में मैंने उपराज्यपाल श्री मनोज सिंहा जी से बात कर स्तिथि का जानकारी ली है. NDRF, CRPF, BSF और स्थानीय प्रशासन बचाव कार्य में लगे हैं. लोगों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है. सभी श्रद्धालुओं की कुशलता की कामना करता हूँ.”

 

NDRF

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