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Author : Sanjeev Kumar

पटना: जातिगत जनगणना को लेकर सभी पार्टियों की सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी. ये बैठक पटना में आयोजित हुआ था. जहां RJD का प्रतिनिधित्व तेजस्वी यादव कर रहे थे. तेजस्वी यादव ने कहा कि बिल को अगली कैबिनेट बैठक में लाने और नवंबर के महीने में इसे शुरू करनी चाहिए. उनका आगे कहना था कि छठ पुजा में बिहार से बाहर रहने वाले कई लोग घर आते हैं इस समय आकड़े सही प्राप्त होंगे, और पर्याप्त समय भी तैयारी करने के लिए मिल जाएगा. पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जातीय जनगणना है ना कि जनगणना, ये हमारी जीत है. बैठक के दौरान तेजस्वी ने बताया कि इसमें मानव शास्त्रियों को शामिल करने के लिए अपना सुझाव दिया है. इसे लेकर केन्द्र सरकार को आगे आना चाहिए और आर्थिक रुप से समर्थन करना चाहिए. ये फैसला बिहार के रहने वाले लोगों के हित में है.

नीतीश कुमार ने कही ये बात

बिहार प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार ने बैठक को लेकर अपनी खुशी जताई. उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना कराने के लिए केंद्र की अनिच्छा के बाद राज्य में “सभी जातियों और समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण” करेगी. वही सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, कुमार ने कहा कि विशाल अभ्यास के लिए आवश्यक कैबिनेट मंजूरी जल्द ही दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये खुशी के बात है कि सभी दलों के लोगों ने इस बैठक को लेकर सर्वसम्मति से समर्थन किया है.

बीजेपी से कौन-कौन शामिल

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और राज्य इकाई के प्रमुख संजय जायसवाल ने बैठक में भाग लिया. बीजेपी अपने केन्द्र के फैसले पर अडिग रही. इस बैठक को लेकर बीजेपी के नेताओं ने कैमरे से बचने की कोशिश की. जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी के कई नेता इसके हक में नहीं है लेकिन उनके भी अपनी मजबूरी है. आपको बता दें कि केन्द्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर राज्य सरकार जातीय जनगणना कराना चाहती है तो राज्य सरकार स्वतंत्र है. केन्द्र सरकार के तरफ से कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिल पाएगी.

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रोहतास पत्रिका/पटना: बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर सभी पार्टियों की सहमति बन गई है. इस बात की जानकारी शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दी. शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने पहले ही बता दिया है कि जाति आधारित जनगणना पर जल्द ही पटना में एक बैठक होगी. मंत्री ने स्पष्ट करते हुए बताया कि बिहार सरकार ने एक जून (बुधवार) को पटना में जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक करने का फैसला किया है. इस तारीख पर सभी दलों ने अपनी सहमति जताई है. आगे चौधरी ने कहा कि बैठक का स्थान 4 देश रत्न मार्ग, पटना में शाम करीब 4 बजे आयोजित होगा. वही बैठक में सभी पार्टियों के शीर्ष नेताओं का आगमन तय माना जा रहा है.

सभी पार्टियों की सहमति

27 मई को हुई बैठक को लेकर नीतीश कुमार ने सकारात्मक संकेत दिए थे. बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को छोड़कर RJD, JDU, कांग्रेस, वाम दल, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) और अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सहित सभी दलों ने जाति-आधारित जनगणना पर सहमति व्यक्त की. भाजपा अपने केंद्रीय नेतृत्व के रुख पर अड़ी हुई थी, जिसने देश में जाति आधारित जनगणना नहीं करने का फैसला किया था हालांकि अब बीजेपी की रूख में हल्की नरमी देखी जा रही है.

BJP की असहमति से टूट जाएगी गठबंधन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जाति आधारित जनगणना कराने के अपने फैसले पर अडिग हैं. BJP थिंक टैंक का मानना ​​है कि अगर वे बिहार में जाति आधारित जनगणना का विरोध करेंगे तो सीएम नीतीश कुमार बीजेपी से गठबंधन तोड़ सकते हैं और राजद की मदद से बिहार में सरकार बना सकते हैं. नीतीश कुमार और तेजस्वी की बढ़ती नजदीकियों से BJP परेशान दिख रही है. भाजपा को डर सता रहा कि गठबंधन ना टूटे, इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपनी सहमति जताई है. आपको बता दें, प्रधानमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि राज्य अपने खर्च पर जाति आधारित जनगणना करने के लिए स्वतंत्र हैं.

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Author : Sanjeev Kumar

बिहार के पूर्व मुखिया लालू प्रसाद के घर तड़के सुबह CBI की टीम ने रेड मारी है. पटना और दिल्ली समेत 17 ठिकानों पर छापेमारी जारी है. टीम ने बताया कि रेलवे भर्ती बोर्ड में हुई गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई हुई है. पटना, दिल्ली और गोपालगंज समेत कई जगहों पर रेड जारी है. घर के सदस्यों को अलग-अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की जा रही है. वहीं दिल्ली में मिसा भारती के घर पर CBI के बड़े अधिकारी पहुंचे है.

तेज प्रताप यादव को बैठाया पेड़ के नीचे

CBI की टीम पहुंचते ही RJD के कार्यकर्ताओं ने घर के बाहर प्रदर्शन करना शुरु कर दिया है. धरने पर बैठे कई RJD के नेताओं ने कहा कि ये बदले की राजनीति है. सरकार हमारे नेता लालू यादव जी को परेशान करने में लगी है लेकिन हम चुप बैठने वाले नहीं है. वहीं टीम ने तेज प्रताप को पेड़ के नीचे बैठा दिया था. इसके बाद तेज प्रताप ने बिना कुछ कहे चुपचाप पेड़ के नीचे बैठे रहें. 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर CBI की 8 सदस्यीय अफसरों में महिला कर्मचारी भी छानबीन के लिए पहुंची है. आवास में किसी को अंदर बाहर जाने पर रोक लगा दिया गया है. टीम सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है. वहीं राबड़ी देवी से पूछताछ करने की खबरें आ रही हैं.

पुरा मामला क्या है?

आपको बता दे कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव रेलमंत्री थे इसी बीच रेलमंत्री ने नौकरी देने के बदले जमीन और कई प्लॉट लिए. इसी आरोप को लेकर एक नया केस दर्ज हुआ है, जिसे लेकर CBI की टीम जांच में लगी है. ये केस लालू यादव और उनकी बेटी मिसा भारती पर हुई है. इधर, RJD के विधायक मुकेश रौशन ने कहा कि RJD और JDU के नजदीकियों से BJP परेशान हो गई है इसलिए छापेमारी करवा रही हैं. इस समय लालू यादव की तबीयत खराब है, उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है और तेजस्वी यादव भी शहर से बाहर है.ऐसे समय में रेड मारना उचित नहीं है.

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Author : Sanjeev Kumar

Chaudhary charan singh

रोहतास पत्रिका/नई दिल्ली:

हर साल 23 दिसंबर को देश में ‘राष्ट्रीय किसान दिवस’ मनाया जाता है, लेकिन इस बार ये किसान आंदोलन की वजह से मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर पूरे देश में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। एक कृषि प्रधान देश होने के नाते भारत की बहुसंख्यक आबादी खेती से जुड़ी है। चलिए इस बहुसंख्यक आबादी से जुड़े ‘किसान दिवस’ के इतिहास पर नजर डालते हैं और आज के परिपेक्ष्य में समझने की कोशिश करते हैं।

किसान दिवस मनाए जाने का प्रमुख कारण देश में किसानों की प्राथमिकता को महत्व देना एवं उनके हित में चलाई गई योजनाओं के बारे में किसानों को परिचित कराना है। किसान दिवस पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर मनाया जाता है। 23 दिसंबर 1902 को जन्मे चौधरी चरण ने किसानों के हित में अनेक कदम उठाए थे। बता दें इनका कार्यकाल भारत के पांचवे पीएम के रूप में जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक रहा था। इनके प्रधानमंत्री रहते ही नई दिल्ली में 23 दिसंबर 1978 को ‘किसान ट्रस्ट’ की स्थापना हुई थी।

ऐसे बने थे राजनीति के ‘चौधरी’

चौधरी चरण सिंह पहली बार 1937 में विधायक चुने गए थे। जिन्हें 1977 तक छपरौली-बागपत से विधायक बने रहने का मौका मिला। 1967 में कांग्रेस छोड़कर चौधरी चरण ने अपनी नई पार्टी बना ली थी। ‘भारतीय क्रांति दल’ के नाम से बनी इस पार्टी को उस समय के नेता राममनोहर लोहिया का साथ मिला। किसानों से उनका लगाव और बदलते राजनीतिक समीकरण के वजह से उन्हें पहली बार यूपी में गैर कांग्रेसी पार्टी की सरकार का अगुवाई करने का मौका मिला, और वो यूपी के मुख्यमंत्री बन गए। 1967 से 1970 तक सीएम के पद पर उन्होंने कार्य किया। उन्होंने ही अपने कार्यकाल के दौरान जमींदारी प्रथा को खत्म कर किसानों को बड़ी राहत पहुँचाई थी। खाद पर से सेल्स टैक्स भी हटा लिया था।

राजनीतिक व्यक्तित्व के जयंती पर मनाए जा रहे किसान दिवस में आज देश का किसान खुद राजनीति के दिग्गजों के बुने जाल में फंसता जा रहा है। देश के बहुसंख्यक आबादी का एक वर्ग इन ठंडी हवाओं को बर्दाश्त कर दिल्ली से सटे बॉर्डर पर अपनी मांग को लेकर अड़ा हुआ है और सरकार इसके फायदे गिना रही है।

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