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Sadar Hospital Sasaram

रोहतास पत्रिका/सासाराम: राज्य सरकार सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने को लेकर लगातार प्रयासरत है। लोगों को अधिक से अधिक स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए सरकारी अस्पतालों को सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। जांच सुविधओं की बात की जाए तो पैथोलॉजी से लेकर अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, एमआरआई सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं । हालांकि इन सुविधाओं के बीच विभागों के अनियमित संचालन की वजह से लोगों को कभी कभी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इधर जिला स्वास्थ्य समिति इन समस्याओं को दूर करने में लगा हुआ है।

  • सासाराम प्रखण्ड के मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सचिव संजीव मोहन ने कहा कि सरकारी अस्पताल में पहले से सुविधाएं बेहतर हो रही हैं लेकिन इन सुविधाओं को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में खासकर सदर अस्पताल में यदि प्रसव के दौरान गर्भवती महिला की स्थिति बिगड़ने लगती है तो उसे रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा सदर अस्पताल में बनाया गया ट्रामा सेंटर भी रेफरल अस्पताल की तरह कार्य कर रहा है। इमरजेंसी स्थिति में मरीज को वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। आवश्यकता है ऐसे मामलों का सरकारी अस्पतालों में ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो ताकि गरीब लोगों को असुविधा ना हो। साथ ही साथ साफ सफाई पर और ध्यान देने की जरूरत है।
  • मरीज का इलाज कराने सदर अस्पताल पहुँचे शिवसागर प्रखण्ड के सोनहर गाँव निवासी अवध बिहार पांडे ने बताया कि कुछ वर्ष पहले सरकारी अस्पताल में ज्यादा व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था सुधारने के बावजूद भी कुछ जांच में विभाग द्वारा लापरवाही बरती जा रही है इसमें सुधार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कुछ कमियों को दूर किया जाए जिससे लोगों को फायदा होगा।

एक छत के नीचे मिलेगी कई हाई टेक स्वास्थ्य सुविधा

डीपीसी संजीव मधुकर ने बताया कि बिहार के 8 जिलों के अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में चयनित किया गया है। जिसमें सदर अस्पताल भी शामिल है। उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर में 100 बेड का मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेंटर (एमसीएच) एवं 10 बेड का पेडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट का भी निर्माण करवाया जा रहा है। डीपीसी ने बताया कि सासाराम सदर अस्पताल में एक ही छत के नीचे कई सारी हाई टेक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का लगातार प्रयास जारी

रोहतास सिविल सर्जन डॉ के एन तिवारी ने बताया कि सासाराम सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है। कई सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भवन निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि लगभग 56 करोड़ की लागत से कई भवनों का निर्माण किया जा रहा है। सिविल सर्जन ने बताया कि आने वाले समय में सरकारी अस्पताल में कई बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।

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Dengue
  • निजी जांच क्लिनिकों से भी मांगा जा रहा है आंकड़ा

रोहतास पत्रिका/सासाराम: बारिश का मौसम खत्म होते ही रोहतास जिले में डेंगू के मामले में धीरे-धीरे कमी आने लगी है। सितंबर -अक्टूबर के महीने में जहां रोहतास जिले में लगभग प्रतिदिन डेंगू के लक्षण वाले मरीज पाए जा रहे थे,वहीं पूर्व की अपेक्षा अब ऐसे मरीजों के मामले में भी कमी आई है। जिला स्वास्थ्य समिति से मिली जानकारी के अनुसार रोहतास जिले में 25 अक्टूबर तक 15 डेंगू से पीड़ित मरीज की पुष्टि हुई थी।

बेहतर इलाज के बाद सभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं वर्तमान में जिले में एक भी डेंगू का मरीज नहीं है। हालांकि निजी जांच क्लिनिकों में जांच के दौरान डेंगू के लक्षण वाले मरीज मिल रहे लेकिन पहले की अपेक्षा काफी कम संख्या में ऐसे मरीज मिल रहे हैं। जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार सदर अस्पताल में हो रही जांच के दौरान पिछले 11 दिनों में एक भी डेंगू के लक्षण वाले मरीज नहीं मिले हैं। जिले में डेंगू के घटते प्रकोप से जिला स्वास्थ्य समिति ने भी थोड़ी राहत की सांस ली है। वहीं जिला स्वास्थ्य समिति डेंगू को लेकर अभी भी सतर्क है। सदर अस्पताल में डेंगू वार्ड को अभी भी चालू रखा गया है। ताकि विपरीत परिस्थितियों से निपटा जा सके।

सरकारी अस्पताल में डेंगू जांच जारी

जिला मलेरिया विभाग में कार्यरत जेपी गौतम ने बताया कि जिले में डेंगू को लेकर लगातार जांच की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में फिलहाल नए मामले सामने नहीं आ रहे हैं । उन्होंने बताया कि डेंगू को लेकर लगातार सतर्कता बरती जा रही। डेंगू का ज्यादा खतरा सितम्बर से अक्टूबर तक देखने को मिलता है। ठंड बढ़ते ही डेंगू के मच्छर धीरे धीरे कम होने लगते हैं, फिर भी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए घरों के साथ साथ आस पास के जगहों को साफ रखें। गंदा पानी न जमा होने दें। सरकारी अस्पतालों में जांच के दौरान डेंगू पॉजिटिव आने पर उक्त व्यक्ति का सैम्पल एलिसा जांच के लिए गया भेजा जा रहा है। एलिसा जांच में पॉजिटिव आने पर ही उसे कन्फर्म केस माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक आई जांच रिपोर्ट में 15 लोगों में डेंगू पाया गया था जो इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ्य स्वस्थ्य हैं।

डेंगू के लक्षण दिखने पर कराएं जांच

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि जिले में डेंगू के मामले में काफी कमी आई है। उन्होंने बताया कि डेंगू में आई कमी के बावजूद भी सभी सरकारी अस्पतालों को जांच करने के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं । साथ ही उन्होंने बताया कि जिले में कितने डेंगू के लक्षण वाले मरीज हैं , इसके लिए निजी जांच क्लिनिकों से भी आंकड़ा जमा किया जा रहा है। एसीएमओ ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, आंखों में दर्द, अधिक थकान या कमजोरी महसूस हो तो डेंगू जांच करवा लें।

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Covid vaccination
  • पिछले 10 दिनों में 10,963 लोगों की कोरोना जांच, मिले 3 संक्रमित

रोहतास पत्रिका/सासाराम: जिले में कोरोना संक्रमण का प्रभाव लगभग धीरे-धीरे समाप्त हो चुका है। हालांकि 1-2 मरीज कभी कभार मिल भी जा रहे हैं, इसलिए जांच अभियान को जारी रखा गया है,। ताकि संक्रमण के प्रसार को फैलने न दिया जाए। इसको लेकर जिला स्वास्थ्य समिति लगातार लोगों से सावधानी बरतने के लिए भी अपील कर रही है। इधर त्यौहार को देखते हुए जिला स्वास्थ्य समिति ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच अभियान को जारी रखने के लिए निर्देश दिया है।

छठ पर्व को लेकर दीपावली के समय से ही अन्य राज्यों से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में जिले में कोरोना के साथ साथ बढ़ते डेंगू रोग के लिए भी जांच अभियान लगातार चलाया जा रहा है। कोरोना जांच किट से लेकर डेंगू जांच किट की उपलब्धता सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रचुर मात्रा में करा दी गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश भी दिए गए हैं कि बुखार, सर्दी खासी, बदन दर्द से पीड़ित व्यक्ति इलाज के लिए आते हैं तो उनकी कोरोना जांच के साथ साथ डेंगू जांच भी करायी जाए।

पिछले 10 दिनों में जिले में मिले 3 कोरोना पॉज़िटिव

कोरोना संक्रमण की बात करें तो रोहतास जिले में पिछले 10 दिनों के भीतर जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 10,963 लोगों का कोरोना जांच हुई,। इस दौरान महज 3 संक्रमित मरीज पाए गए । जिसमें 12 अक्टूबर को 0, 13 अक्टूबर को 0, 14 अक्टूबर को 0, 15 अक्टूबर को 0, 16 अक्टूबर को 1, 17 अक्टूबर को 0, 18 अक्टूबर को 1, 19 अक्टूबर को 0, 20 अक्टूबर को 1 एवं 21 अक्टूबर को 0 संक्रमित व्यक्ति पाए गए। जिला स्वास्थ्य समिति से मिली जानकारी के अनुसार अभी जिले में कोरोना संक्रमित एक्टिव मरीजों की संख्या महज 3 है । जिन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया गया है।

टीकाकरण अभियान में तेजी

कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर जारी टीकाकरण अभियान को भी लगातार जारी रखा गया है। तयौहारों को देखते हुए टीकाकरण अभियान में भी तेजी लाई गई है, ताकि अन्य राज्यों से लौट रहे लोगों को वंचित डोज से टीकाकृत किया जा सके। रोहतास जिले में अब तक 43 लाख से अधिक लोगों को टीकाकृत किया जा चुका है। जिसमें प्रथम डोज का टीका लेने वालों की संख्या 20 लाख 46 हजार से अधिक है। वहीं दूसरी डोज लेने वालों की संख्या 18 लाख 40 हजार तथा प्रीकॉशन डोज लेने वालों की संख्या 4 लाख 20 हज़ार से अधिक है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

रोहतास के सिविल सर्जन डॉ केएन तिवारी ने बताया कि रोहतास जिला संक्रमण के मामले काफी हद तक बेहतर स्थिति में है। त्यौहार को देखते हुए संक्रमण के साथ-साथ डेंगू बीमारी पर भी नजर रखी जा रही है। लोगों की जांच की जा रही है। वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ आर के पी साहू ने बताया कि जिले में प्रथम एवं दूसरे डोज लेने वालों की संख्या काफी बेहतर है। प्रीकॉशन डोज को लेकर लोगों में थोड़ी सुस्ती देखी जा रही है। डॉ साहू ने बताया कि प्रीकॉशन डोज से वंचित लोगों को टीकाकृत करने के लिए लगातार प्रयास जारी है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण किया जा रहा है।

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tb
  • टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र लोगों को कर रहा है प्रेरित

रोहतास पत्रिका/सासाराम: टीबी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए लगातार उन्मूलन अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही साथ टीबी बीमारी को 2025 तक जड़ से मिटाने के लिए आम नागरिकों को अहम भूमिका निभाने के लिए मौका भी दिया जा रहा है। टीबी से ग्रसित मरीजों के लिए सामान्य नागरिक, गैर सरकारी संस्थान, जनप्रतिनिधि सहित अन्य लोगों को निक्षय मित्र बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। निक्षय मित्र बन कर टीबी मरीजों को सहायता करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील कर रहा है। ताकि जिले में टीबी से ग्रसित मरीजों को मदद मिल सके।

निक्षय मित्र टीबी मरीजों को पोषण के साथ साथ रोरगार के लिए अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। विदित हो कि रोहतास जिले में 1300 के आसपास टीबी के मरीज इलाजरत हैं । वहीं टीबी बीमारी से ग्रसित मरीजों को निश्चय पोषण योजना के तहत प्रत्येक माह 500 रुपये सहायता राशि प्रदान की जाती है। टीबी मरीजों को और अधिक सुविधा और लाभ मिल सके तथा उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके इसके लिए निक्षय मित्र योजना की शुरुआत की गयी है।

निक्षय मित्र बनने के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र से कर सकते हैं सम्पर्क

निक्षय मित्र बनने के लिए अपने जिला यक्ष्मा केंद से संपर्क किया जा सकता है। निक्षय मित्र बनने के लिए communitysupport.nikshay.in पर लॉगिन कर प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान पर क्लिक कर निक्षय मित्र रजिस्ट्रेशन फॉर्म पर क्लिक कर कर अपनी पूरी जानकारी देकर इस अभियान से जुड़ा जा सकता है। इसके अलावा इस निक्षय हेल्प लाइन नंबर 1800116666 पर कॉल कर के विस्तृत जानकारी ली जा सकती है। वहीं निक्षय मित्र बनने के लिए टीबी से ग्रसित मरीजों की सहमति लेकर पोषण के लिए उन्हें सहायता राशि उपलब्ध करानी होगी।

निक्षय मित्र बनने से टीबी मरीजों में जागेगा आत्मविश्वास

सीडीओ सह जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ राकेश कुमार ने बताया कि टीबी मरीजों को सरकार प्रति माह सहायता राशि उपलब्ध कराती है। इसके अलावा सरकार ने मरीजों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निक्षय मित्र योजना की शुरुआत की है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति निक्षय मित्र बन कर टीबी संक्रमित मरीजों को सहायता पहुंचा सकता है।

उन्होंने बताया कि एक निक्षय मित्र अपनी सहूलियत के अनुसार एक से अधिक टीबी मरीजों को गोद ले सकते हैं। टीबी मरीजों को गोद लेने के बाद निक्षय मित्र प्रत्येक माह हर मरीज को पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपये राशि प्रत्येक माह प्रदान कर सकते हैं। यह राशि कम से कम 6 माह तक प्रदान करना है। सीडीओ ने कहा कि टीबी मरीजों के लिए आम लोगों को आगे आने से उनमें आत्मविश्वास की भावना जगेगी।

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Dengue in CIty
  • अपर निदेशक-सह-राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
  • रैपिड डायग्नोस्टिक किट जांच से संदिग्ध रोगियों की होती है पहचान
  • समाज में अनावश्यक भय को रोकने को लेकर जारी किये गए निर्देश

रोहतास पत्रिका/सासाराम: आजकल डेंगू के फैलाव एवं इससे लोगों के ग्रसित होने की ख़बरें प्रायः देखने को मिल रही हैं। ऐसा पाया गया है कि निजी अस्पतालों एवं जांच घरों में डेंगू की जांच रैपिड डायग्नोस्टिक किट से एनएस 1 घनात्मक परिणाम आने पर उसे डेंगू मरीज घोषित कर दिया जाता है। रैपिड डायग्नोस्टिक किट जांच से संदिग्ध मरीज चिह्नित किये जा सकते हैं किन्तु यह जांच रोग को संपुष्ट नहीं करता। समाचार पत्रों में इसकी सूचना छपने पर समाज में अनावश्यक भय व्याप्त हो जाता है।

अपर निदेशक-सह-राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने पत्र जारी कर दिए निर्देश

स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक सह वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ विनय कुमार शर्मा ने राज्य के सभी सिविल सर्जन को डेंगू की जांच ज़िले के निजी अस्पताल एवं जांच घरों में कराने से संबंधित दिशा-निर्देश दिया है। जारी पत्र में बताया गया है कि निजी अस्पतालों एवं जांच घरों में डेंगू की जांच रैपिड डायग्नोस्टिक किट (आरडीटी किट) से करने के बाद परिणाम आते ही उसे डेंगू मरीज घोषित कर दिया जाता है। भारत सरकार द्वारा डेंगू की आधिकारिक रूप से जांच की प्रक्रिया केवल एलिसा एनएस1 एवं आईजीएम किट से करने का निर्देश है।

डेंगू से बचाव के लिए शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर

चिकित्सकों के अनुसार वेक्टर जनित रोगों में वे सभी रोग आ जाते हैं जो मच्छर, मक्खी या कीट के काटने से होते हैं, जैसे: डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्क्रब टायफस या लेप्टोंस्पायरोसिस आदि। मलेरिया एवं डेंगू या अन्य वेक्टर जनित रोगों से बचने के लिए दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी कर सकते हैं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर है। घर के सभी कमरों की सफ़ाई के साथ ही टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी, फ्रिज में पानी को स्थिर नहीं होने देना चाहिए। गमला, फूलदान का पानी एक दिन के अंतराल पर बदलना जरूरी है।

बरसात के दिनों में जलजमाव के कारण बढ़ता है मच्छरों का प्रकोप

बरसात के मौसम में जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप काफ़ी बढ़ जाता है। इस कारण मलेरिया और डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना प्रबल हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ज़िले में मच्छरों से बचाव करने एवं सुरक्षित रहने के लिए मीडिया एवं सोशल मीडिया साइट्स के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है। मच्छरों से होने वाली बीमारियों में मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, जापानी इन्सेफेलाइटिस, जीका वायरस, चिकनगुनिया आदि प्रमुख हैं। वहीं मच्छरों के काटने से सबसे अधिक मामले मलेरिया और डेंगू के ही आते हैं। घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर सतर्कता बरतना जरूरी है। वहीं मॉल एवं दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टन में पानी जमा नहीं होने दें।

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