Sanjeev Kumar

मैं रोहतास पत्रिका के साथ ईमानदार पत्रकारिता करने की कोशिश कर रहा हूँ, जिसका सरोकार आम जनता से है। अभी तक का मेरा सफ़र एक डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर रहा है। मुझे क्राइम से जुड़ें घटनाओं पर लिखना पसंद है।

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रोहतास पत्रिका/पंजाब: मोहाली स्थित CGC यूनिवर्सिटी ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ₹50 करोड़ की CGCUET स्कॉलरशिप योजना लॉन्च की है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी के एडमिशन और मार्केटिंग के जनरल मैनेजर डॉ. हितेश कलोटा ने दी। इस अवसर पर बिहार की राजधानी पटना के होटल रेड वेलवेट में प्रिंसिपल-कम-टीचर्स मीट का आयोजन भी किया गया, जिसमें 50 से अधिक स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हुए।

डॉ. हितेश कलोटा ने बताया कि CGC यूनिवर्सिटी, जो पहले CGC झंजेरी के नाम से जानी जाती थी, 2012 में स्थापित एक नई उम्र की यूनिवर्सिटी है। यह यूनिवर्सिटी NAAC A+ ग्रेड, NIRF रैंकिंग और NBA मान्यता के साथ उत्तरी भारत की अग्रणी यूनिवर्सिटियों में शामिल है। CGC यूनिवर्सिटी AI-आधारित कोर्स, मजबूत एकेडमिक्स, रिसर्च और बेहतरीन प्लेसमेंट पर विशेष फोकस करती है, जिससे छात्रों को शानदार करियर के अवसर मिलते हैं।

एकेडमिक सत्र 2026-27 के लिए लॉन्च की गई ₹50 करोड़ की CGCUET (CGC यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) स्कॉलरशिप का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक अंतर को पाटना है, ताकि कम आय वाले परिवारों के मेधावी छात्र बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें। इससे पहले यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप राशि ₹7 करोड़ थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹50 करोड़ कर दिया गया है।

पटना में आयोजित बैठक के दौरान नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर भी विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षकों और प्रिंसिपलों ने छात्रों के लिए सही कोर्स और कैंपस चयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. हितेश कलोटा ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का आधार शिक्षा है और शिक्षक समाज व राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

CGC यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री एस. रशपाल सिंह धालीवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश है और आर्थिक परेशानियां किसी के सपनों में बाधा नहीं बननी चाहिए। वहीं, मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अर्श धालीवाल ने कहा कि यह स्कॉलरशिप कार्यक्रम भविष्य के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगा।

CGCUET स्कॉलरशिप के चयन मानदंडों में एकेडमिक रिकॉर्ड, एंट्रेंस एग्जाम का प्रदर्शन, लीडरशिप क्वालिटी, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी, सम्मान और कार्य अनुभव शामिल हैं। CGC यूनिवर्सिटी का यह प्रयास देशभर के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के नए द्वार खोलेगा।

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सासाराम। इतिहास इस बात का साक्षी है कि विश्व की अधिकांश सभ्यताएँ नदियों के किनारे विकसित हुईं। देश-दुनिया के बड़े शहर आज भी नदियों के तट पर बसे हैं, लेकिन सासाराम एक ऐसा प्राचीन शहर है जो आज बिना किसी नदी के अस्तित्व में है। आश्चर्य की बात यह है कि सासाराम का लिखित इतिहास 251 ईसा पूर्व तक जाता है।

शहर की प्राचीनता का प्रमाण चंदतन शहीद पीर पहाड़ी पर स्थित सम्राट अशोक के लघु शिलालेख से मिलता है, जो ईसा पूर्व 251 का माना जाता है। उसी काल में यहां बौद्धों का समागम हुआ था। इसके अलावा शहर में मल्लाह (मछुआरा) समाज की दो बड़ी बस्तियां—भारतीगंज और चंवर तकिया—आज भी मौजूद हैं, जबकि आमतौर पर मल्लाहों की आबादी नदी किनारे ही बसती है।

नदी के जमीन पर खेती करते लोग!

इतिहासकारों के अनुसार सासाराम में कभी कुदरा नामक नदी बहती थी। यह नदी कैमूर पहाड़ी की वादियों से निकलकर शहर के दक्षिणी छोर को छूते हुए पश्चिम दिशा में बहती थी। वर्ष 1912 और 1931 के पुराने नक्शों में इस नदी का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। यहां तक कि 1971 के सर्वे नक्शे में भी इसके निशान दर्ज हैं। शहर के दक्षिणी छोर पर नदी के नाम से बसा मोहल्ला और वहां बना पुल भी इसके अस्तित्व की गवाही देता है।

कालांतर में सोन नहर प्रणाली के विकास के दौरान बेदा नहर को इसी नदी पर पुल बनाकर पार कराया गया। धीरे-धीरे जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और मानवीय लापरवाही के कारण कुदरा नदी सूखती चली गई। आज स्थिति यह है कि नदी का अधिकांश भू-भाग या तो बंदोबस्त कर दिया गया है या फिर अतिक्रमण की चपेट में है।

नदी का एक हिस्सा कचरे के ढेर में तब्दील!

विडंबना यह है कि न तो आम लोग और न ही प्रशासन इस विलुप्त नदी को लेकर गंभीर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुदरा नदी आज भी जीवित होती, तो सासाराम को भूमिगत जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। कभी जीवनदायिनी रही यह नदी अब केवल नक्शों और इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह गई है।

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Rohtas Patrika/Patna: लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के तहत राज्य में उद्यमिता और रोजगार सृजन को नई दिशा देने के उद्देश्य से स्टार्ट-अप समिट 2025 का आयोजन 24 अगस्त को पटना के रविन्द्र भवन में होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। दिल्ली स्थित एंजेल निवेशक अमित कुमार ने घोषणा की है कि चयनित 21 स्टार्ट-अप्स को 21 लाख रुपये का फंड प्रदान किया जाएगा।

इस अभियान का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत में विकसित बिहार का निर्माण करना है। शिक्षा, समता और उद्यमिता को मूल मंत्र बनाकर चल रहे इस अभियान से अब तक 2.5 लाख से अधिक लोग सीधे जुड़े हैं, जिनमें 15 हजार से अधिक उद्यमी और कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ लोग भी शामिल हैं। वर्तमान में 350 से अधिक स्टार्ट-अप्स इस अभियान के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

21 स्टार्ट-अप्स को मिलेगा सम्मान

इस समिट में बिहार के 21 ऐसे स्टार्ट-अप्स को “बिहार उद्यमिता सम्मान” दिया जाएगा, जिनमें 100 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है या जिनकी भविष्य की संभावनाएं अत्यंत प्रबल हैं। साथ ही इस अवसर पर ड्राफ्ट बिहार विजन 2047 डाॅक्यूमेंट भी जारी किया जाएगा, जिस पर सुझाव लेकर इसे 21 दिसंबर, 2025 को बेंगलूरू में आयोजित होने वाले बिहार @ 2047 विजन कॉन्क्लेव में बिहार को समर्पित किया जाएगा।

बड़े उद्यमियों और निवेशकों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी जिनमें विकास वैभव (मुख्य संरक्षक), सर्वेश कुमार (एमएलसी), सैयद शमाएल अहमद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, PSACWA), विपुल कुमार (उपाध्यक्ष CtrlS), निरेन आनंद (सोशल फुटवियर उद्यमी), ओ.पी. सिंह (सीईओ, बर्नेट फार्मास्युटिकल्स), राहुल कुमार सिंह (मुख्य समन्वयक), डॉ. प्रीति बाला (गार्गी चैप्टर), सोनम मिश्रा (उपाध्यक्ष, सुलभ इंटरनेशनल) और अन्य शामिल हैं।
व्यापक अभियान

लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के तहत अब तक देश और विदेश में 2200+ कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। हाल के वर्षों में दिल्ली, दुबई, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद और वडोदरा तक इस अभियान की गूंज सुनाई दी है। इसके अलावा, बेगूसराय, आरा, सासाराम, छपरा और वैशाली में हुए बृहत जन संवादों में हजारों लोगों की भागीदारी रही।

सामाजिक और शैक्षणिक बदलाव की दिशा

यह अभियान सिर्फ उद्यमिता तक सीमित नहीं है, बल्कि 14 जिलों में 27 निःशुल्क शिक्षा केंद्र और 250 से अधिक स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से सामाजिक बदलाव का भी प्रयास कर रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित गार्गी पाठशाला और चिकित्सकों द्वारा चलाए जा रहे जीवक अध्याय से अब तक हजारों लोग लाभान्वित हुए हैं। स्टार्ट-अप समिट 2025 न केवल बिहार के युवाओं को अवसर देगा, बल्कि राज्य को एक नए आर्थिक और सामाजिक बदलाव की ओर ले जाने का संकल्प भी है।

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रोहतास पत्रिका/सासाराम: जिला विधिक संघ एवं रोहतास बार एसोसिएशन में आयोजित विशेष बैठक के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार जैन ने अधिवक्ताओं को मिडिएशन सेटलमेंट सेंटर की कार्यप्रणाली और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस बैठक का उद्देश्य मिडिएशन प्रक्रिया के ज़रिये न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी, तेज और जनोन्मुखी बनाना था। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर जिले में मिडिएशन (मध्यस्थता) के ज़रिये मामलों के निपटारे की प्रक्रिया आगामी 90 दिनों तक चलाई जाएगी।

किन-किन मामलों का होगा समाधान?

जिला जज ने बताया कि मैट्रिमोनियल केस, एक्सीडेंटल क्लेम, डोमेस्टिक वायलेंस, चेक बाउंस, कमर्शियल विवाद और क्रिमिनल कंपाउंडेबल ऑफेंस जैसे मामलों को इस केंद्र के माध्यम से सुलझाया जाएगा। इन मामलों में पक्षकार आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे, जिससे कोर्ट का समय बचेगा और न्याय शीघ्रता से मिलेगा।

जिला विधिक संघ एवं बार एसोसिएशन में आयोजित विशेष बैठक में मौजूद अधिवक्ता

समयसीमा और प्रक्रिया

हाईकोर्ट के आदेशानुसार 18 जुलाई 2025 तक ऐसे केस चिन्हित कर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद, इन केसों की सूचना/नोटिस 28 जुलाई तक भेजी जाएगी। सुनवाई के दौरान फिजिकल और VC (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) दोनों माध्यमों से पक्षकारों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

अधिवक्ताओं और मजिस्ट्रेट की भूमिका

मिडिएशन प्रक्रिया में 40 घंटे का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त अधिवक्ता और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये लोग केस की प्रकृति के अनुसार पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित कर समाधान की दिशा में पहल करेंगे।

जिला जज ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे इस व्यवस्था को सहयोग दें और ज़्यादा से ज़्यादा केसों को चिन्हित कर समय पर सूची भेजें, जिससे इस अभियान को सफल बनाया जा सके।

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