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Delhi Free Bus service

रोहतास पत्रिका/नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने 150 Electric Bus सड़कों पर मंगलवार को उतारने के लिए घोषणा किया है. मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal मंगलवार के दिन बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के लिए तोहफा दिया है. मुख्यमंत्री हमेशा दिल्ली वाले को कोई ना कोई कारनामा करके चौंकाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि तीन दिन तक आप इन बसों का लाभ फ्री में उठा सकते हैं. यानी आप 24 मई से लेकर 26 मई तक इन बसों में बिना किराया दिए आप सफर कर सकेंगे. 150 बसों को शामिल करने के साथ ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी हो जाएगी.इस बात की जानकारी दिल्ली सरकार के एक बयान में दिया गया है.

इन बसों में काफी आधुनिक फिर्चस दिए गए हैं. जीरो स्मोक और जीरो एमिशन वाली इन अत्याधुनिक बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, 10 पैनिक बटन, दिव्यांगों के लिए रैंप आदि है. वहीं बसों की ठहराव मुंडेला कलां, राजघाट और रोहिणी सेक्टर-37 में तीन डिपो बनाए गए हैं. डिपो को काफी आधुनिक तरीके से बनाया गया है. जहां पर बसों की रखरखाव की जाएगी. ये पुरी तरह से विद्युतीकृत है. आपको बता दें, इन बसों की रूट दिल्ली के प्रमुख रूटों- रिंग रोड पर तीवरा मुद्रिका, मोरी गेट और महरौली टर्मिनल के बीच रूट नंबर 502, आईपी डिपो पर रूट नंबर E-44, साथ ही कनॉट प्लेस, सफदरजंग, साउथ एक्सटेंशन, आश्रम, जंगपुरा और इंडिया गेट मार्गों पर चलेंगी.

वही परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि Electric Bus पुरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से लैस है. आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार हमेशा अपने लोगों को परिवहन के हरित साधनों में स्थानांतरित करने और ईवी पर स्विच करने के लिए प्रेरित कर रही है. सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से सार्वजनिक परिवहन के स्थायी साधनों में बदलाव एक जीवन शैली में बदलाव है जिसे हम दिल्लीवासियों में देखना चाहते हैं.

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रोहतास पत्रिका/नई दिल्ली: सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जापान पहुंच गए हैं. अगले दो दिनों तक मोदी का कार्यक्रम है जहां पर वो अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन और ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीस से मुलाकात करेंगे.वही इस कार्यक्रम का मेजबान जापान है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी क्वाड के सभी नेताओं से मिलेंगे.

प्रधानमंत्री ने सुबह में फोटो के साथ ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘उगते सूरज की भूमि. आगे टोक्यो में प्रधानमंत्री जापान के व्यापारियों के साथ-साथ भारतीय समुदाय के लोगों से मिलेंगे. वही कार्यक्रम में शामिल होने से पहले एक सरकारी बयान में कहा गया है कि हमारी प्रमुखता क्वाड पहल की समीक्षा दुनिया के चार नेताओं के लिए प्रमुख एजेंडा में से एक रहेगी.

सोमवार को प्रधानमंत्री इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) कार्यक्रम में शामिल होंगे. इस कार्यक्रम के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन के द्वारा मोदी को आमंत्रित किया गया है. एक सरकारी बयान के आधार पर विश्व के दोनों बड़े दोनों नेताओं की मुलाकात होगी. जहां पर अमेरिका के साथ अपने बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा और क्षेत्रीय विकास और समकालीन वैश्विक मुद्दों पर भी अपनी बातचीत जारी रखी जाएगी.

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने द्विपक्षीय बैठक में कहा कि हम हम यूक्रेन में तस्वीर को कैसे देखते हैं. हम यूक्रेन पर पहले जैसे ही बात करेंगे. वही इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) का इरादा आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और डिजिटल व्यापार सहित क्षेत्रों में सामान्य मानकों के माध्यम से क्षेत्रीय देशों को अधिक निकटता से जोड़ना होगा.

इस कार्यक्रम का मुख्य भाग क्वाड मीटिंग है जहां समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र, उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां, समुद्री सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन और कोविड से जुड़ी चुनौतियों और प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी. मार्च में चारों देशों के नेताओं ने वर्चुअल मीटिंग की थी. उस समय स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री थे. यूक्रेन युद्ध शिखर सम्मेलन के दौरान उभरे प्रमुख मुद्दों में से एक था. क्वाड शिखर सम्मेलन को लेकर चीन आपत्ति जताते हुए कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली इंडो-पैसिफिक रणनीति क्षेत्र में विभाजन पैदा करने और टकराव को भड़काने की एक चाल है. आगे चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि “तथ्य साबित करेंगे कि तथाकथित इंडो-पैसिफिक रणनीति मूल रूप से विभाजन पैदा करने, टकराव को भड़काने और शांति को कमजोर करने की रणनीति है.”

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नई दिल्ली: शुक्रवार की रात को दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बताया कि प्रोफेसर के द्वारा सोशल साइट पर आपत्तिजनक फोटो अपलोड किया गया था जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची. प्रशासन ने आगे बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना) और 295 ए (जानबूझकर कार्य करना) के तहत गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली के एक वकील ने रतन लाल के खिलाफ मंगलवार की रात साइबर पुलिस स्टेशन (उत्तरी दल्ली) में FIR दर्ज कराई. शिकायतकर्ता ने बताया कि लाल ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. वकील विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में लिखा है कि प्रोफेसर के द्वारा सोशल साइट पर हिंदुओं के आराध्य देवता भोलेनाथ के शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किया गया था.

क्या है पुरा मामला?

अयोध्या के बाद बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना है. हाल के महीनों में पांच महिलाओं ने जिला अदालत में एक याचिका दायर की, जिसमें श्रृंगार गौरी मन्दिर में प्रतिदिन पुजा करने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई. इसके बाद कोर्ट ने फैसला लेते हुए कहा कि मस्जिद की वीडियोग्राफी हो. तीन बार वीडियोग्राफी के बाद कई ऐसे प्रमाण मिले जो हिंदुओं के पक्ष में था. मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग की आकृति जैसा पत्थर मिला, जिसे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि ये शिवलिंग नहीं है फव्वारा है. इस मसले पर एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल ने भगवान भोलेनाथ को लेकर विवादित पोस्ट शेयर किया था. ये पोस्ट काफी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसके बाद कई हिंदुओं संगठन के कार्यकर्ताओं आपत्ति जताई थी. इस मामले को लेकर रतन लाल कहना है कि हमने ऐसा को विवादित पोस्ट नहीं किया है जिससे हिंदुओं का भावना को ठेस लगे. इसे पहले भी हमने काफी पोस्ट शेयर किया है जो कि काफी साफ और स्वच्छ रहा है.

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America Frequency

रोहतास पत्रिका/डेस्क: अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी वेरिजोंन और AT&T ने 12 जनवरी को अमेरिका में 5G लांच किया। उसके बाद से ही कई देशों की एयरलाइन कंपनियों ने अमेरिकी शहरों को जाने वाली हवाई उड़ानों को रद्द कर दिया। जिसमे भारत की एयर इंडिया, जापान एयरलाइंस और दुबई की एमिरेट्स भी शामिल है।

अमेरिका व अन्य देशों के 5G

फ्रांस, यूरोप समेत 50 से अधिक देशों में 5G इंटरनेट की सेवाएं प्रारम्भ होने के बाद अब 12 जनवरी से अमेरिका में भी ये सुविधाएं शुरु की जा चुकी है। जिसके बाद से ही कई देशों ने अपनी हवाई उड़ाने रद्द कर दी है, जिसमे इंडियन एयरलाइन ने 8, दुबई की एयरलाइन एमिरेट्स 9 और जापान एयरलाइन की 2 उड़ाने शामिल है।

5G की फ्रीक्वेंसी

अमेरिका 3.7GHz – 3.9GHz
यूरोप 3.4GHz – 3.4GHz
फ्रांस 3.6 GHz – 3.8 GHz

हवाई जहाज के अल्टीमीटर की फ्रीक्वेंसी

हवाई जहाजों के अल्टीमीटर की रेडियो तरंगों की फ्रिक्वेंसी 4.2Ghz – 4.4GHz के बीच रखी जाती है। लगभग एक जैसी फ्रीक्वेंसी होने की वजह से हवाई जहाज में बैठे पायलेट को गलत सूचना मिल सकती है, जिसके कारण टेक ऑफ या टेक ऑन के दौरान या अल्टीमीटर से मौसम की गलत सिग्नल मिलने से दुर्घटना होने की संभावना है।

क्या हो सकता है उपाय

अमेरिका में लगभग 1 मिनेट में 60 से 70 हवाई जहाजों की लैंडिंग होती है, ऐसे में हवाई उड़ानों पे पाबंदिया लगती रही तो अमेरिका के साथ साथ उससे जुड़े अन्य देशों के आर्थिक सेहद पर इसका असर सीधे पड़ेगा। तो ऐसी स्थिति से उबरने के लिए अमेरिका को भी फ्रांस और यूरोपीय देशों की तरह ही एयरपोर्ट के आस पास के इलाकों में 5G इंटरनेट जैमर का उपयोग करना चाहिए, जिससे उस क्षेत्र में उत्त्पन्न होने वाली तकनीकी समस्यांयों से निजाद मिल सके।

अमेरिका के गलतियों से भारत भी रहे सावधान

फ्रांस, यूरोप और अमेरिका के बाद अब जल्द ही भारत के भी 13 राज्यों में 5G इंटरनेट का परीक्षण होने जा रहा है। इसमें दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहर भी शामिल है। अमेरिका में 5G इंटरनेट से उत्तपन होने वाली समस्या न केवल अमेरिका तक ही सीमित रहेगी, बल्कि यही समस्या 5G के आने के बाद हमारे देश में भी उत्तपन होगी। तो ऐसे में आगामी 5G के भारत में प्रवेश करने के लिए हमे इन बातों को संज्ञान में रखते हुए कार्य करने होंगे।


लेख: आयुष पांडेय

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Sahitya Kavitayen

रोहतास पत्रिका/डेस्क: ‘कविताएँ’ पेज ने ‘दलित विमर्श’ से जुड़ी एक कविता अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट की थी।  उस पोस्ट को कुछ देर बाद ही इंस्टाग्राम ने यह कह कर अपने प्लेटफार्म से हटा दिया कि “आपका यह पोस्ट हमारे गाइडलाईन से बाहर है इसलिए आपके पोस्ट को हम डिलीट कर रहे है।” साहित्य से जुड़े लोग एवं पाठक इंस्टाग्राम के इस कदम को गलत बताते हुए विरोध कर रहे है।

पोस्ट में क्या था

कविताएँ पेज पर पोस्ट किए गए कविता को कवि बच्चा लाल ‘उन्मेष’ ने लिखा हैं। यह कविता एक दलित के व्यवस्था पर प्रकाश डालती है। इस कविता को अधिकांश लोगों द्वारा विभिन्न प्लेटफार्म पर रिपोर्ट किया गया है। कविता के कुछ अंश इस प्रकार है।

कौन जान हो भाई?
“दलित हैं साब!”
नहीं मतलब किसमें आते हो?
आपकी गाली में आते हैं
गन्दी नाली में आते हैं
और अलग की हुई थाली में आते है साब!
मुझे लगा हिन्दू में आते हो!
आता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में!

क्या कहते है साहित्य से जुड़ें लोग 

कविताएँ पेज के एडमिन अफ़ताब हुसैन ने कहा कि हमारे पेज पर साहित्य से जुड़े पोस्ट किए जाते हैं। हमारी कोशिश रहती है की हमलोग सभी प्रकार के पोस्ट को अपने प्लेटफार्म पर जगह दें। हमारे पेज से इंस्टाग्राम पर लगभग 1.50 लाख जुड़े है तथा अन्य सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में लोग हमे पसंद करते है।

वहीं साहित्य से जुड़े सुष्मित सिन्हा ने कहा, “बच्चा लाल ‘उन्मेष’ की कविताएं साहित्यकारों के क्रांति को दर्शाती हैं। जो समाज में दलितों, शोषितों और पिछड़ों की आवाज को बुलंदी से उठाते हैं। ऐसे साहित्यकारों ने दशकों से अपने कलम की ताकत से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन के लिए काम किया है। इंस्टाग्राम डिजिटल युग का एक ऐसा संस्थान है जहां इन विचारों को मुखरता से जगह मिलनी चाहिए। उन्मेष की कविता को इंस्टाग्राम ने जिस तरह से हटाया है उसका विरोध होना चाहिए।”

Sahitya Kavitayen
इंस्टाग्राम पर डिलीट हुए पोस्ट का स्क्रीनशॉट

पोस्ट डिलीट होने के बाद लोगों ने क्या लिखा, आप भी पढ़े

एक यूजर ने लिखा कि “ऐसा माना जाता है कि कविता पढ़ने वाले लोग तो प्रगतिशील होंगे ही। कुछ लोग नहीं चाहते कि समाज के पिछड़े वर्ग के हक़ में कोई भी आवाज़ उठाए। साहित्यिक मंचो पर ‘मंटो’ को पूजने वाली इस पीढ़ी के लोगों की गर्दन जब कोई ठंडे पानी में डालता है तो ये लोग तिलमिला जाते हैं। कुछ लोगों ने यह फ़ॉर्म्युला क्रैक कर लिया है कि ‘प्रगतिशील’ दिखते कैसे हैं और यक़ीन मानिए ये लोग बस दिखना जानते हैं। इस से बचने की जरूरत है।”

मोटी-मोटी किताबें पढ़कर उन किताबों की जिल्द से इन्होंने ‘प्रगतिशीलता’ का चोला ओढ़ लिया है। एक वर्ग के लिए लिखी गयी कविताओं को हम हक़ नहीं दे पा रहे तो उस वर्ग से ताल्लुक़ रखने वाले हाड़-माँस के लोग जब अपना हक़ माँगेंगे तो उनको तो ज़िंदा दफ़ना दिया जाएगा। कार्ल मार्क्स कहते हैं ‘जो साहित्य वंचितों की बात नहीं करता मैं उसे साहित्य ही नहीं मानता।’

वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, ”एक कविता से जब अन्यायकारी लोग तिलमिला जाते हैं तो वही कविता की जीत है।
ऐसी कविताओं को अन्यायकारी वर्ग अगर ऐसे ही दबाता रहेगा तो हम दुगुने वेग से गड्ढा खोदेंगे और उन कविताओं को झंडा बनाकर इस मुल्क की हवाओं में लहरा देंगे। शरीर में मौजूद पानी और खून की आख़िरी बूँद तक हम साहित्य को घुटने नहीं टेकने देंगे। हम पर साहित्य का क़र्ज़ है । यह क़र्ज़ कविताएँ लिखकर तो नहीं चुका पाएँगे मगर कुछ कविताओं को उनकी सही जगह पहुँचाकर यह क़र्ज़ ज़रूर उतारा जा सकता है।

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