Photo: Dainik Bhaskar

Rohtas Patrika/Sasaram:

कैमूर पहाड़ी पर बसे पिपरडीह पंचायत अंतर्गत हरैयाडीह गांव में डायरिया के चपेट में आने से 50 लोग बीमार हो गए। डायरिया फैलने की सूचना स्वास्थ विभाग को मिली, सूचना मिलते ही नौहट्टा राजकीय अस्पताल से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मुकेश कुमार, स्वास्थ्य प्रबन्धक रूपक सिंह, बीसीएम राजेश कुमार स्वास्थ्य विभाग के टीम को लेकर हरैयाडीह के लिए पैदल ही निकल पड़ें। एएनएम उर्मिला कुमारी हरैयाडीह गांव में पहले से ही डायरिया से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज कर रही है।

मरीजों के लिए कम पड़ी दवाइयां 

एएनएम उर्मिला सलाईन बोतल पानी व आवश्यक दवा लेकर पहले ही पहुंची थी, लेकिन अधिक मरीज होने के कारण दवा और पानी कुछ घंटो ख़त्म हो गया। आपको बतां दें कि हरैयाडीह गावं दो जिलों के बीच में पड़ता है और यहाँ की स्वास्थ सेवाएं नौहट्टा पीएचसी से ही बहाल होती है। नौहट्टा प्रखण्ड मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दुरी पर स्थित हरैयाडीह गांव जाने का रास्ता काफी दुर्गम है। गावं जाने वाले 30 किलोमीटर रास्ता तो बिलकुल ही ख़राब है तथा पहाड़ पर कुरमुरा नदी व दुर्गावती नदी को पार कर के जाया जाता है। बरसात का मौसम होने के कारण दोनों नदियां उफान पर है।

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सुचना के बाद तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई मेडिकल टीम

ग्रामीणों द्वारा डायरिया की सुचना नौहट्टा पीएचसी को दी गई थी। जिसके बाद एएनएम उर्मिला कुमारी इमरजेंसी दवाइयां और मेडिकल किट के साथ दुर्गम रास्तों को पार करते हुए हरैयाडीह गांव पहुंची। मामला बढ़ता देख उन्होंने इसकी सुचना तत्काल प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार को दी। जिसके बाद डॉ मुकेश मेडिकल टीम को तत्काल गावं के लिए रवाना कर दिए। दवा कम पड़ने के बाद रेहल से कुछ दवाइयां हरैयाडीह गांव भेजी गई है। वहां पर जल्द और दवा और टीम को कैसे पहुंचाई जाए, उसकी रणनीति बनाई जा रही है। 

क्या कहते है रोहतास सिविल सर्जन

रोहतास सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मुकेश कुमार, प्रबंधक रुपक सिंह, राजेश कुमार टीम व दवा पानी लेकर घाटी के रास्ते पैदल गए हुए हैं। 10 से 15 किलोमीटर जंगल में चलने के बाद उस गावं में पहुंचेंगे। फ़िलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।