रोहतास पत्रिका/नई दिल्ली(शर्मिष्ठा सुमन): पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुए कैबिनेट की बैठक में शिक्षा क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी। उन्होंने बताया कि 34 वर्ष के बाद भारत के शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। इस बदलाव के लिए हमने बड़े स्तर पर सलाह ली है। जिसमें 2 लाख 50 हजार ग्राम पंचायत 6600 प्रखंड तथा 676 जिले शामिल है।

नई शिक्षा नीति में अब 10 + 2 पैटर्न को हटाकर, अब 5 + 3 + 3 + 4 पैटर्न लाया गया है। यानि कि अब पहला 5 साल प्री प्राइमरी के श्रेणी में रखा गया है। जिसमें कक्षा दो तक फाउंडेशन होगा तथा कक्षा 3 से 5 तक को तैयारी श्रेणी में रखा गया है। वहीं कक्षा 6 से 8 तक को मध्य शिक्षा श्रेणी में रखा गया है तथा कक्षा 9 से 12 तक माध्यमिक शिक्षा श्रेणी के अंतर्गत आएगा।
उच्च शिक्षा में भी बड़े स्तर पर बदलाव किया गया है। इस बदलाव के बाद से अब कोई विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई छोड़ सकता है तथा जब भी उसका भी मन हो, वह वहीं से पढ़ाई को पूरी कर सकता है। वहीं अब से स्नातक में पढ़ने वाले छात्रों को हर वर्ष स्नातक की डिग्री दी जाएगी। डिग्री देने का जो प्रावधान है वह इस प्रकार है: प्रथम वर्ष सर्टिफिकेट डिग्री द्वितीय वर्ष डिप्लोमा डिग्री तथा तृतीय वर्ष स्नातक डिग्री दी जाएगी।
कैबिनेट के इस बैठक में एक और बदलाव किया गया है सन 1985 में शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया था जिसे अब फिर से शिक्षा मंत्रालय में तब्दील कर दिया गया।
अब छठी कक्षा से विद्यार्थियों को वोकेशनल सब्जेक्ट और कोडिंग लेने की छूट मिलेगी।
नई शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत किए गए इस बड़े बदलाव को सत्र 2020 से लागू किया जाएगा।

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